September 30, 2022

अपनाएं मोरीता थेरेपी मन रहेगा टेंशनफ्री, जानिए इसके बारे में सब कुछ

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मेंटल इलनेस (Mental Illness) की समस्या इन दिनों दुनिया भर के लोगों को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है। इसका असर फिजिकल हेल्थ (Physical Health) पर भी पड़ता है। एक्सपर्ट्स की माने तो इससे उबरने में जापान में प्रचलित मोरीता थेरेपी (Morita Therapy) बहुत कारगर हो सकती है। आज के दौर में मानसिक तनाव, एंग्जाइटी, डिप्रेशन जैसी मेंटल प्रॉब्लम्स से दुनिया के ज्यादातर लोग परेशान रहते हैं। सही ट्रीटमेंट ना किए जाने पर इससे कई शारीरिक बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं और आत्महत्या के मामले भी बढ़ते हैं।
जापानी थेरेपी है कारगर
जापान के साइकोथेरेपिस्ट, बौद्ध चिंतक और विचारक शोमा मोरीता (1874 से 1938) ने तमाम मानसिक समस्याओं जैसे-ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर, पोस्ट ट्रामेटिक स्ट्रेस, न्यूरोसिस, डिप्रेशन और टेंशन आदि के इलाज के लिए अपनी नई थेरेपी इजाद की जो बेहद प्रभावी साबित हुई। इस थेरेपी के माध्यम से हम अपने दिमाग को शांत और संतुलित रख सकते हैं। इसके लिए इसके मूल सिद्धांतों को समझना होगा।
अपनी फीलिंग को स्वीकारें
जब हम अपने ऑब्सेसिव विचारों को कंट्रोल करने या उनसे छुटकारा पाने की कोशिश करते हैं तो उनमें और उलझ जाते हैं। इसलिए उन्हें स्वीकार कर लें। हां हमें उन्हें ऑब्जर्व करना चाहिए।
वही करें जो करना चाहिए
आपको अपने अनुभव, गतिविधियों , क्रियाकलापों से सीख लेनी चाहिए। इस थेरेपी में आपको अपने अनुभवों से सही गलत का पता लगाने की सलाह दी जाती है।
जीवन का मकसद समझें
हम अपनी भावनाओं को भले नियंत्रित ना कर सकें लेकिन अपने क्रिया-कलापों को अपने बस में अवश्य रख सकते हैं, इसलिए हमें रोज अपने लक्ष्य और उद्देश्यों का पता होना चाहिए। जब हम इनकी पूर्ति के लिए सक्रिय रहते हैं तो सहज ही व्यस्त और सामान्य रह सकते हैं।
थेरेपी के चार चरण
मोरीता थेरेपी में मरीज का इलाज 15 से 21 दिनों तक चलता है, जो 4 चरणों में होता है।
एकांतवास और विश्राम
इसमें मरीज एक कमरे में बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के रहता है। यहां तक कि टीवी, पुस्तक, मित्र, रिश्तेदार, परिवार के सदस्यों से भी बातचीत करने की अनुमति नहीं होती। बस मरीज और उसके विचार। सिर्फ थेरेपिस्ट उस से मिलता है।
लाइट ऑक्यूपेशनल थेरेपी
इसमें मरीज मौन रहकर काम करता है और अपने विचारों, अनुभूतियों को एक डायरी में लिखता है। वह कुदरत की गोद में विचरण करता है और ब्रीदिंग एक्सरसाइज करता है। क्रिएटिव और रीक्रिएटिव एक्टिविटीज में इंवॉल्व रहता है लेकिन सिवाय थेरेपिस्ट उसे किसी से बात करने की इजाजत नहीं रहती।
ऑक्यूपेशनल थेरेपी
इस चरण में मरीज से मेहनत वाले काम कराए जाते हैं। साथ ही लेखन, पेंटिंग और अन्य काम भी कराए जाते हैं। इस चरण में मरीज दूसरों से बात कर सकता है लेकिन सिर्फ उसी काम के बारे में, जो वह वर्तमान में कर रहा होता है।
वास्तविक जीवन में वापसी
इस चरण में मरीज फिर से नॉर्मल सोशल लाइफ में आ जाता है। लेकिन वह मेडिटेशन और ऑक्यूपेशनल थेरेपी मेंटेन करता है।
शिखर चंद जैन

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