October 4, 2022

Knowledge News: कैसे हुई थी स्वदेशी आन्दोलन की शुरुआत, जानिए इससे जुड़े फैक्ट्स

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Knowledge News: स्वदेशी आन्दोलन 
Knowledge News: स्वदेशी आंदोलन (Swadeshi Movement) भारत के उन महत्वपूर्ण आन्दोलन में से एक था, जो भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन (Indian Independence Movement) का हिस्सा रहे और जिसने भारतीय राष्ट्रवाद के विकास में योगदान दिया। दिसंबर 1903 में बंगाल के विभाजन (Division of Bengal) के लिए ब्रिटिश सरकार (British Government) के निर्णय के सार्वजनिक होने के बाद, भारतीयों में बहुत अधिक असंतोष था। जिसके जवाब में स्वदेशी आंदोलन औपचारिक रूप से टाउन हॉल कलकत्ता से 7 अगस्त 1905 को घरेलू उत्पादन पर निर्भर होकर विदेशी वस्तुओं पर अंकुश लगाने के लिए शुरू किया गया। महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने इसे स्वराज की आत्मा के रूप में वर्णित किया। आंदोलनों में भारत में उत्पादित वस्तुओं का उपयोग करना और ब्रिटिश निर्मित वस्तुओं को जलाना शामिल था। ब्रिटिश सरकार द्वारा बंगाल के विभाजन का फैसला करने के बाद बाल गंधधर तिलक (Bal Gangadhar Tilak) ने स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को प्रोत्साहित किया।
कैसे बढ़ा आन्दोलन का रूप
स्वदेशी आन्दोलन के तब तक बड़ा बनने के चांस नहीं थे जबतक कि इसमें पूरा देश एक साथ भागीदारी न रखता। दरअसल इस आन्दोलन के दौरान कई अमीर भारतीयों ने द्वारा खादी और ग्रामोद्योग समाजों को समर्पित धन और भूमि दान की जिस कारण ये आन्दोलन बढ़ना शुरु हुआ। आर्थिक मदद के कारण अब हर घर में कपड़ा उत्पादन शुरु हो गया था। इसके साथ ही इसमें गांव में चलने वाले अन्य उद्योग भी शामिल थे ताकि गांवो को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।
स्वदेशी आन्दोलन के फैक्ट्स
निष्कर्ष
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इस आंदोलन को अपने स्वतंत्रता संग्राम के लिए शस्त्रागार के रूप में इस्तेमाल किया और अंततः 15 अगस्त 1947 को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू द्वारा इंडिया गेट, नई दिल्ली के पास ‘प्रिंसेस पार्क’ में’ भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया गया।
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