September 25, 2022

Knowledge News: एशिया के सबसे स्वच्छ गांव के बारे में जानिए, पीएम मोदी भी कर चुके हैं दौरा

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Knowledge News: यूं तो साफ सफाई का ध्यान रखना हर एक व्यक्ति का कर्तव्य होता है। क्योंकि साफ-सफाई की वजह से वातावरण ठीक रहता है और गंभीर बीमारियों का खतरा भी नहीं होता है। ऐसे में हम आपको एशिया के सबसे स्वच्छ गांव के बारे में बता रहा हैं। इस गांव का दौरा पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narender Modi) भी कर चुके हैं। बता दें कि एशिया और भारत का सबसे स्वच्छ गांव मेघालय के सिलोंग (shillong) और भारत-बांग्लादेश सीमा से लगभग 90 किमी की दूरी पर बसा हुआ है। गांव का नाम मावल्यंनोंग (Mawlynnong village) है।
इस गांव में सौ परिवार निवास करते हैं और यह गांव (मावल्यंनोंग) भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया का सबसे स्वच्छ गांव है। प्रधानमंत्री मोदी भी इस गांव का दौरा कर चुके हैं। गांव मावल्यंनोंग में हर कोई स्वच्छता को लेकर सजग है। इसी गांव की यही खास बता है। ऐसा कहा जाता है कि अगर किसी भी व्यक्ति को रास्ते में जाते वक्त कचरा (कूड़ा) दिखाई देता है तो वह उसे डस्टविन (कूड़ेदान) डाले बिना आगे नहीं बढ़ता है। इस गांव के लोगों का कहना है कि हमारे बुजुर्गों ने हमें स्वच्छता के साथ-साथ पर्यावरण को साफ कैसे रखा जाता है इसके बारे में भी हमें सिखाया है।

मावल्यंनोंग गांव को साल 2003 डिस्कवरी मैगजीन से किलिनेस्ट विलेज ऑफ एशिया का टाइटल मिला है। इस गांव में बच्चे, बड़े और बुजुर्ग तक साफ सफाई का खास ध्यान रखते है। इस गांव में पेड़ों से पुल बने हुए हैं, जोकि अपने आप में अद्भुत है। पेड़ों से बने ये मजबूत पुल केवल मेघालय में ही देखने को मिलते हैं। यहां पर भारी संख्या में पर्यटक भी जाते हैं। यदि कोई पर्यटक यहां पर कचरा फेंकता है तो उसे डोनेशन देना पड़ता है।

जानकारी के लिए आपको बता दें कि ये गांव एशिया सबसे स्वच्छता के साथ ही शिक्षा के मामले में भी आगे है। इस गांव की साक्षरता दर 100 प्रतिशत है। यही वजह है कि इस गांव के अधितर लोग अंग्रेजी में बात करते हैं। यहां पेड़ से टूटी सूखी पत्तियों को करीब 2 वर्ष के लिए एक खड्डे में डाल दिया जाता है। 2 वर्ष में ये सूखी पत्तियां खाद्द बन जाती हैं। गांव के लोग बचे हुए खाने को जंगली सूअर या अन्य जानवर को डाल देते हैं। गांव के हर एक घर में शौचालय भी बना हुआ है।
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