December 3, 2022

कुदरत ने दिखाया करिश्मा… 7 महीने से कोमा में पड़ी महिला ने बच्ची को दिया जन्म, डॉक्टर्स भी हैरान

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Woman In Coma For 7 Months Delivers Healthy Baby Girl: 31 मार्च को 23 वर्षीय शफिया एक गंभीर मोटरबाइक दुर्घटना की शिकार हुई, जिसके बाद उन्हें दिल्ली के एम्स ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। 22 अक्टूबर को लगभग सात महीने बाद, उसने उसी अस्पताल में एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। चूंकि शफिया पिछले करीब सात महीने से कोमा में है, लिहाजा डॉक्टर्स हैरान हैं। साथ ही, इसे कुदरत का करिश्मा बताया जा रहा है। हालांकि प्रसव के बाद भी शफिया कोमा में हैं, लिहाजा उम्मीद है कि कुदरत ने अगर बच्ची पर कृपा की तो वो जल्द खुद सामने से अपनी बेटी का लाड़-दुलार करेगी।
एक मीडिया चैनल ने एम्स (AIIMS) के न्यूरोलॉजिस्ट (Neurologist) की टीम से बात की है, जिन्होंने शफिया का इलाज किया। न्यूरोलॉजिस्ट ने बताया कि शफिया और उसका पति मोटरसाइकिल से अपने मायके जा रहे थे, तभी उनका खतरनाक एक्सीडेंट हो गया। बाइक ने एक स्पीड-ब्रेकर को टक्कर मार दी, जिससे दोनों सड़क पर ही गिर गए। इस जोड़े की शादी को दो महीने से भी कम समय हुआ था।
न्यूरोलॉजिस्ट ने कहा, “उन दोनों में से किसी ने भी हेलमेट नहीं पहना था। जब उन्हें अस्पताल लाया गया, तब शफिया बेहोश थी। शफिया के दिमाग में गंभीर चोट और एक थक्का दिखा था, इसलिए उन्हें तुरंत वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया। इसके बाद उनकी आपातकालीन सर्जरी हुई, इस सर्जरी में शफिया के दिमाग से वह थक्का निकाल दिया गया।”
ऐसे पता चला कि शफिया है प्रेग्नेंट (How they know Shafia is pregnant)
हर अस्पताल में सर्जरी से पहले एक प्रोटोकॉल को फॉलो किया गया जाता है। इस नियम का पालन करते हुए डॉक्टर्स की टीम ने शफिया के कुछ टेस्ट किए थे, जिसमें से एक मूत्र परीक्षण था। इस टेस्ट में ही पता चला कि शफिया गर्भवती थी। डॉक्टरों के मुताबिक, वह अपने टेस्ट के समय लगभग 40 दिन प्रेग्नेंट थी।
अगले पांच महीनों में हुई पांच सर्जरी (Five surgeries in the next five months)
आपातकालीन सर्जरी के सफल रहने के बाद भी उन्हें लाइफ सपोर्ट पर रखा गया, जिसके बाद अगले पांच महीनों में पांच बड़ी और छोटी सर्जरियों से शफिया को गुजरना पड़ा। इस बीच शफिया को एक पाइप की मदद से खाना खिलाया जाता और सांस लेने में सहायता के लिए उसकी श्वासनली में एक छोटा सा छेद बनाया गया। इससे यह सुनिश्चित हो गया कि भ्रूण को आवश्यक पोषण और सांस लेने के लिए हवा मिल रही है।
न्यूरोलॉजिस्ट ने कहा, “शफिया के एबॉर्शन करने को लेकर डॉक्टर्स में बहुत चर्चा हुई, क्योंकि मां अभी भी कोमा में थी। बाद में अल्ट्रासाउंड की मदद से पता लगाया गया कि कहीं बच्चे को किसी तरह की कोई जन्मजात परेशानियां तो नहीं है। इस मामले के लिए गठित बोर्ड ने मां की स्थिति को देखते हुए गर्भावस्था को समाप्त करने का फैसला परिवार पर छोड़ दिया गया था। हालांकि, उन्हें अदालत की अनुमति भी लेनी पड़ी।”
परिवार ने किया यह बड़ा फैसला (family took this big decision)
परिवार ने शफिया की गर्भावस्था को जारी रखने का फैसला किया, बशर्ते कि इससे शफिया के स्वास्थ्य को नुकसान न पहुंचे। न्यूरोलॉजिस्ट ने कहा, “हमें लगातार मां और बच्चे की निगरानी करनी पड़ती थी। हम चिंतित थे कि क्या बच्चे को पर्याप्त पोषण मिल रहा था और क्या वह बच्चा आम बच्चों की तरह बढ़ रहा था। हम लगातार अल्ट्रासाउंड की सहायता से निगरानी कर रहे थे।”
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