November 28, 2022

Diet Plan For All Age Group: बच्चों से बुजुर्गों तक हर ऐज ग्रुप के लिए जानें बिल्कुल परफेक्ट डाइट प्लान! सेहत का रखें ख्याल

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Diet Plan For All Age Group: हेल्दी लाइफ के लिए सबसे जरूरी है कि रेग्युलर बैलेंस्ड-न्यूट्रिशस डाइट लेते रहें। लेकिन इससे पहले आपको यह जानना भी जरूरी है कि किस उम्र के व्यक्ति के लिए परफेक्ट डाइट कैसी होनी चाहिए? नेशनल न्यूट्रिशन वीक (1-7 सितंबर) के अवसर पर हम आपको बता रहे हैं, अलग-अलग उम्र के लोगों के लिए बैलेंस्ड न्यूट्रिशस डाइट के बारे में। आज की इस खबर में लखनऊ के अपोलो मेडिक्स अस्पताल की न्यूट्रीशनिस्ट डॉ. चेतना बंसल ने हर उम्र के हिसाब से ली जाने वाली बैलेंस डाइट के बारे में बताया है।
न्यूट्रीशनिस्ट के मुताबिक हम रोजाना भोजन के रूप में जो भी खाते हैं, उसका प्रभाव हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। डाइट में मौजूद न्यूट्रिएंट्स से ना केवल हमें एनर्जी मिलती है, बल्कि यह शारीरिक-मानसिक विकास के लिए भी जरूरी है और विभिन्न बीमारियों से बचाने में भी सहायक होते हैं। अगर शरीर को जरूरत के मुताबिक पूरा पोषण नहीं मिलता तो कई समस्याएं, रोग और संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। ध्यान रहे कि हमारी डाइट उम्र, लिंग, शारीरिक बनावट, दिनचर्या और सक्रियता के हिसाब से बदलती रहती है। इसलिए सभी को यह पता होना चाहिए कि अच्छी हेल्थ-न्यूट्रिशन के लिए क्या और कितनी मात्रा में खाना जरूरी है?
डाइट का आइडियल फंडा
आहार विशेषज्ञो के अनुसार खाने की प्लेट को 4 हिस्से में बांटना चाहिए। एक-चौथाई हिस्से में कार्बोहाइड्रेट से भरपूर अनाज, दूसरे हिस्से में मौसमी सब्जियां हों, तीसरे में प्रोटीन फूड्स हों और चौथे हिस्से में बारहमासी सलाद के तौर पर खाई जाने वाली सब्जियां, मौसमी फल और दूध से बनी चीजें होनी चाहिए। हेल्दी डाइट का यह फंडा डेली डाइट (ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर) में जरूर लागू किया जाना चाहिए। एक्सपर्ट्स के अनुसार तैयार किए गए न्यूट्रीशन पिरामिड में सबसे ज्यादा भाग फल-सब्जियों और साबुत अनाज का होता है। इसके बाद दालें, बींस, सोया की मात्रा। इसके बाद नट, बीज, बींस, मछली, चिकन, अंडे को रखा गया है। फिर कम वसा वाला दूध और दूध से बने पदार्थ आते हैं। और आखिर में रिफाइंड ऑयल और रिफाइंड अनाज कम से कम मात्रा में लेना चाहिए। आहार विशेषज्ञों की राय में हर मील में सभी फूड ग्रुप का सेवन करना जरूरी है। यानी खाने की प्लेट में एनर्जी गिविंग (कार्बोहाइड्रेट), बॉडी बिल्डिंग (प्रोटीन, कैल्शियम) और प्रोटेक्टिव (विटामिन और मिनरल) फूड, फाइबर और पानी सही मात्रा में जरूर शामिल करने चाहिए।
असंतुलन से होने वाली समस्याएं

हेल्दी रहने के लिए जरूरी है कि डाइट में माइक्रो (विटामिन, मिनरल, ओमेगा 3 फैटी एसिड) और मैक्रो (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फैट) न्यूट्रिएंट्स समुचित मात्रा में शामिल हों। इनकी कमी से कुपोषण, एनीमिया के अलावा कई बीमारियां होने की संभावना रहती है। जैसे-विटामिन ए की कमी से अंधापन हो सकता है। विटामिन डी की कमी से कैल्शियम शरीर में अवशोषित नहीं हो पाता, जिससे हड्डियां और मांसपेशिया कमजोर हो जाती हैं। विटामिन सी की कमी से इम्यूनिटी वीक हो जाती है। वहीं कार्बोहाइड्रेट और फैट रिच डाइट ज्यादा लेने से ओबेसिटी, हाइपरटेंशन, डायबिटीज, पीसीओडी, कार्डियोवैस्कुलर जैसी बीमारियां होने का खतरा रहता है। आहार में यथासंभव चीनी और नमक का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। ये शरीर के लिए वाइट पॉयजन का काम करते हैं। इनके अनियंत्रित सेवन से डायबिटीज, ब्लड प्रेशर, मोटापा, हाइपरटेंशन, हार्ट डिजीज होने का खतरा रहता है।
उम्र के अनुसार लें डाइट

हर उम्र के अनुसार पोषण की आवश्यकता अलग होती है। एक्सपर्ट से कंसल्ट कर ही अपना डाइट प्लान बनाना चाहिए।
जन्म के पहले दो वर्षों में बच्चे का अधिकांश पोषण उसकी मां के दूध से होता है। 2-12 साल की उम्र के बच्चों का विकास तेजी से होता है। इसलिए इस दौरान उन्हे एनर्जी से भरपूर, बॉडी बिल्डिंग में उपयोगी और इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने वाले फूड्स देने चाहिए। उनकी डाइट में विटामिन और मिनरल्स से भरपूर दूध और दूध से बने पदार्थ, फल-सब्जियां, दालें शामिल करनी चाहिए। पूरे दिन में 30-35 ग्राम प्रोटीन, 20-25 ग्राम फाइबर, 15-20 ग्राम फैट देना चाहिए। रोजाना केला, सेब, अनार जैसा एक फल खाने को देना जरूरी है। रोजाना 750 मिली. से 1 लीटर दूध पिलाएं। 50-60 ग्राम नॉन वेज दे सकते हैं। इस उम्र में पोषक तत्वो की कमी होने से नजर कमजोर होना, एनीमिया, हड्डियां कमजोर हो सकती हैं, जो बाद में ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियो का कारण बनते हैं।
किशोरों में होने वाले शारीरिक और हार्मोनल बदलावों के लिए प्रोटीन, फैट, आयरन और कैल्शियम रिच डाइट देनी जरूरी है। इसके लिए गाजर, ब्रोकली, हरी पत्तेदार सब्जियां, रेड मीट, मछली, केला, सेब, अनार जैसे फल दिए जा सकते हैं। इसके अलावा 500 मिली. दूध या डेयरी प्रोडक्ट दिए जा सकते हैं।
18-20 साल की उम्र के बाद शारीरिक विकास पूरा हो जाता है, उसे मेंटेन करने के लिए न्यूट्रीएंट्स जरूरी हैं। वयस्क व्यक्ति की हेल्दी डाइट में प्रोटीन, फाइबर और कार्बोहाइड्रेट्स जरूर शामिल करना चाहिए। एक कटोरी दाल, एक कटोरी सब्जी, दो रोटी, एक कटोरी दही, सलाद और फल ले सकते हैं। हड्डियों और मसल्स के लिए डाइट में कैल्शियम-प्रोटीन रिच फूड्स जरूर शामिल करें जैसे- दूध और दूध से बने पदार्थ, हरी पत्तेदार सब्जियां, राजमा, सोयाबीन, बादाम, सफेद तिल, दालें, चिकन, मछली, अंडे का सफेद भाग। डायबिटीज, बीपी, हार्ट डिजीज से बचने के लिए जरूरी है कि आहार में रिफाइंड चीजें- मैदा, नमक और चीनी अवॉयड करें। दिन में 2-3 चम्मच देसी घी, ऑलिव ऑयल, सरसों का तेल ले सकते हैं। फाइबरयुक्त आहार का सेवन ज्यादा मात्रा में करना चाहिए। इस तरह जब आप अपनी उम्र के हिसाब से रेग्युलर डाइट का सेवन करेंगे तो हमेशा हेल्दी और फिट रहेंगे।
बुजुर्गों का मेटाबॉलिज्म रेट कम होने, ऑर्गंस वीक होने, एक्टिविटी कम होने से डाइजेस्टिव और इम्यून सिस्टम गड़बड़ा जाता है। उन्हें थोड़ी-थोड़ी मात्रा में दो-ढाई घंटे के अंतराल पर न्यूट्रीशियस डाइट देनी चाहिए। उनको नियमित रूप से दालें, पनीर, अंडा, नॉन वेज जैसी प्रोटीन रिच डाइट लेनी आवश्यक है। साथ ही उचित मात्रा में विटामिंस, मिनरल्स जरूरी हैं, जो उन्हें हरी सब्जियों और फलों से प्राप्त होंगे। कैल्शियम की कमी से होने वाले ऑस्टियोपोरोसिस, आर्थराइटिस से बचने के लिए बुजुर्गों को दिन में दो गिलास दूध पीना जरूरी है।
प्रस्तुति-रजनी अरोड़ा
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