August 10, 2022

मेरी आवाज ही, पहचान है… पंचतत्व में विलीन हुई स्वर कोकिला, राजकीय सम्मान से अंत्येष्टि

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मुंबई. भारत रत्न, स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर (92) का पार्थिव शरीर रविवार शाम शिवाजी पार्क में पंचतत्व में विलीन हो गया। मंगेशकर के भाई हृदयनाथ मंगेशकर ने उनके शव को मुखाग्नि दी। उनकी अंत्येष्टि राजकीय सम्मान के साथ की गई। सेना के जवानों ने अंत्येष्टि से पहले लता मंगेशकर को नमन किया और उन्हें गन सैल्यूट दी। लता का रविवार सुबह 8.12 मिनट पर ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। उन्हें कोरोना के कारण 8 जनवरी को ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
बीच में उनकी तबीयत ठीक हो गई थी लेकिन शनिवार को अचानक उनकी तबियत बेहद खराब होने के बाद उन्हें फिर से वेंटिलेटर में रखा गया था। लता मंगेशकर के आवास प्रभु कुंज से उनका पार्थिव शरीर शाम 3़ 30 बजे अंतिम संस्कार के लिए शिवाजी पार्क ले जाया गया। रास्ते में सड़क के दोनों ओर का उनका अंतिम दर्शन करने के लिए लोगों की भीड़ लगी थी। लोग हाथों में पुष्प लिए हुए थे और लता के पार्थिव शरीर पर अर्पित कर रहे थे। उनका पार्थिव शरीर जिस वाहन पर रखा गया था, उस पर उनकी बहन ऊषा मंगेशकर और परिवार के अन्य सदस्य सवार थे।

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उनकी पत्नी रश्मि ठाकरे, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार, सांसद सुप्रिया सुले, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, भारत रत्न सचिन तेंदुलकर, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे, उनकी पत्नी शर्मिला ठाकरे, मंत्री आदित्य ठाकरे, पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस और कई अन्य गणमान्य व्यक्ति लता मंगेशकर की अंत्येष्टि में शामिल हुए। बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन पुत्री श्वेता के साथ अंतिम संस्कार के मौके पर पहुंचे थे। शाहरुख खान के अलावा बॉलीवुड की कई जानी-मानी हस्तियां मंगेशकर के अंतिम संस्कार में शामिल हुई।
मोदी ने लता मंगेशकर को पूरे राष्ट्र की ओर से दी श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार शाम यहां शिवाजी पार्क में स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर उन्हें राष्ट्र की ओर से श्रद्धांजलि दी। मोदी ने लता मंगेशकर के शव को चिता पर रखे जाने से पहले उन्हें श्रद्धांजलि दी। प्रधानमत्री सुश्री लता मंगेशकर की बहन उषा मंगेशकर, आशा भोसले और उनके अन्य परिजनों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी।

देश में दो दिन का राजकीय शोक
केन्द्र सरकार ने स्वर साम्राज्ञी एवं भारत रत्न लता मंगेशकर के निधन पर उनके सम्मान में देश भर में दो दिन के राजकीय शोक की घोषणा की। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। इसके अलावा इस अवधि में आधिकारिक स्तर पर किसी भी तरह के मंनोरंजन कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जागा।
बंगाल में आज आधे दिन बंद रहेंगे बाजार व शैक्षणिक संस्थान
पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रसिद्ध गायिका लता मंगेशकर के निधन पर राज्य में सभी व्यवसाय प्रतिष्ठानों और शिक्षण संस्थानों को सोमवार को आधे दिन के लिए बंद रखे जाने की रविवार को घोषणा की।
संगीत की दुनिया के 8 सुरमयी दशक
लता जी ने करीब 1000 से ज्यादा फिल्मों में अपनी आवाज दी। 1960 से 2000 तक एक दौर था, जब लता मंगेशकर की आवाज के बिना फिल्में अधूरी मानी जाती थीं। उनकी आवाज गानों के हिट होने की गारंटी हुआ करती थी। सन 2000 के बाद से उन्होंने फिल्मों में गाना कम कर दिया और कुछ चुनिंदा फिल्मों में ही गाने गाए। उनका आखिरी गाना 2015 में आई फिल्म ‘डुन्नो वाय’ में था।
वर्ष 2001 में मिला भारत रत्न
लता दीदी को 51 साल में 75 से ज्यादा अवॉर्ड मिले। उन्हें महज 30 साल की उम्र में पहला अवॉर्ड मिला था। साल 2001 में उन्हें केंद्र सरकार ने भारत रत्न से नवाजा था। आखिरी बार उन्हें 2 साल पहले टीआरए की मोस्ट डिजायर्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। दुनिया में सबसे ज्यादा गीत गाने के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ। सात बार उन्हें फिल्म फेयर अवॉर्ड मिले। बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर के लिए उन्हें तीन नेशनल अवॉर्ड दिए गए। 1969 में उन्हें पद्म भूषण, 1989 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार, 1999 में पद्म विभूषण और 2008 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया।
‘उनकी आवाज अब जन्नत में गूंजेगी…’
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, ‘वो हमें छोड़कर चली गईं…दशकों की वो आवाज हमें छोड़ गई…उनकी आवाज अब जन्नत में गूंजेगी…शांति? और सुकून की प्रार्थना। फिल्म अभिनेता रजा मुराद ने कहा कि पिछले 80 वर्ष से लता जी श्रोताओं के कानों में रस घोलती थी, हम सब उनके ऋणी हैं। जो भी उनके गाने सुनता था वह मंत्रमुग्ध हो जाता था। जैसे हमारे देश में धरती का स्वर्ग कहे जाना वाला कश्मीर है और एक ताजमहल है उसी तरह एक लता मंगेशकर हैं। उनके कंठ में माँ सरस्वती का वास था। हमने संगीत जगत का कोहिनूर खो दिया।
जिस दिन जन्मे थे कवि प्रदीप, लता ने उसी दिन ली अंतिम सांस
लता जी को गायन की पहली बड़ी ख्याति कवि प्रदीप के कालजयी गीत, ऐ मेरे वतन के लोगों…से मिली। विधि का विधान देखिए, जिस दिन कवि प्रदीप का जन्म हुआ था, लता जी उसी दिन शांत हो गईं। वहीं इसी दिन देश मां सरस्वती को विसर्जित कर रहा था। जब एक नई गायिका के रूप में लता मंगेशकर ने ‘ऐ मेरे वतन के लोगों…’गीत गाया था। खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आंखों में आंसू थे। लता का यह अमर गीत लिखा था कवि प्रदीप ने। प्रदीप का यह गीत लता के सुरों में अमर हुआ। इस गीत को गाए बिना देशभक्ति का कोई कार्यक्रम मुकम्मल नहीं होता।
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