February 6, 2023

FIFA World Cup: वर्ल्ड कप में इस्तेमाल होने वाली फुटबॉल को करना पड़ता है चार्ज, जानिए क्या है इसके पीछे की टेक्नोलॉजी

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फीफा वर्ल्ड कप 2022 (Fifa World Cup 2022) कतर में हो रहा है। हर दिन एक से बढ़कर एक मैच देखने को मिल रहे है। फूटबाल मैच (football match) से जुडी कई खबरें आप रोज़ देख रहे होंगे लेकिन क्या आपको पता है। कि मैच शुरू होने से पहले फुटबॉल को मोबाइल फोन (mobile phone) की तरह चार्च करना पड़ता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर फुटबाल (football) में ऐसा क्या फिट कर दिया गया कि इसे चार्ज करने की जरूरत पड़ती है? इसके पीछे का कॉन्सेप्ट काफी अमेजिंग (quite amazing) है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) से जुड़ा है।

दरअसल फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) में फुटबॉल इतने हाई टेक (high tech) हैं कि उन्हें मैच शुरू होने से पहले चार्ज करना पड़ता है। इस कड़ी में एडिडास ने एक ऐसी गेंद बनाई जिसमे सेंसर (sensors) लगा है। इस गेंद का नाम अल-रिहला (Al-Rihla) दिया गया है। मिली जानकारी के अनुसार इस गेंद को बनाने में एडिडास को 3 वर्ष का समय लगा।
इसलिए चार्ज करना पड़ता है फुटबॉल को
फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) में VAR (Video Analytical Review) का इस्तेमाल होता है। इसकी मदद से रेफरी गेंद की सही लोकेशन के बारे में पता लगाता है। इसे आप ऐसे समझ सकते VAR को क्रिकेट का थर्ड अंपयार (third umpire) कहा जा सकता है, जो वीडियो देखकर मैच में हुए विवाद का निपटारा करते हैं। गेंद को मैच से पहले चार्ज किया जाता है। गेंद में 14-ग्राम सेंसर (14-gram sensor) लगाया गया है। सेंसर की बैट्री लाइफ (life of the sensor) 6 घंटे की होती है। जिसके कारण बॉल को मैच से पहले चार्ज किया जाता है।
कैसे काम करता है सेंसर
बता दें कि गेंद के बीच में सेंसर फीट होता है और गेंद को किक लगते ही सेंसर शुरू (ball kicks) हो जाता है। फील्ड के चारों ओर छोटे-छोटे एंटिना लगे होते हैं जिसे सेंसर की मदद से डेटा भेजा जाता है। इस डेटा को फिर रियल टाइम में इस्तेमाल किया जाता है। इससे VAR का काम आसान हो जाता है। VAR को गेंद की हर मूवमेंट का पता होता है। VAR का मदद से रेफरी को पता होता है कि फुटबॉल को किस गति से किक मारी (football kicked) गई। और गेंद मैदान के किस कोने में हैं और उसकी मूवमेंट किस तरफ की थी।
सेंसर की मदद (help of sensors) से खिलाड़ी की परफॉर्मेंस को भी एनिलाइज किया जाता है। किस खिलाड़ी के पार कितनी देर गेंद रहा किसने कितनी तेजी से दौड़ लगाई ये सब डेटा भी मिलता है। गेंद में सेंसर (sensor) एक ट्रैकिंग डिवाइस (tracking device) की तरह है।
गेंद को बनाने में पाकिस्तान की बड़ी भूमिका रही

इसके अलावा बता दें कि इस गेंद को बनाने में पाकिस्तान की बड़ी भूमिका रही है।पाकिस्तान के सियालकोट (Sialkot) में इस गेंद को बनाया गया है। दुनिया की दो-तिहाई से ज्यादा फुटबॉल्स इस शहर के हजार कारखानों (thousand factories of this city) में बनाई जाती है।

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