November 27, 2022

Commonwealth Games में बजा हरियाणा का डंका : बजरंग पूनिया, दीपक और साक्षी मालिक की गोल्डन जीत, अंशु मलिक को सिल्वर

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जीत के बाद बजरंग पूनिया
इंग्लैंड के बर्मिंघम में खेले जा रहे राष्ट्रमंडल खेलों ( Commonwealth Games 2022 ) में शुक्रवार का दिन हरियाणा के नाम रहा। शुक्रवार को हरियाणा के पांच खिलाड़ियों को देश की झोली में चार गोल्ड और एक सिल्वर मेडल डाले। भारत के स्टार पहलवान बजरंग पूनिया ( Bajrang Punia ) ने पुरूषों की फ्रीस्टाइल 65 किग्रा स्पर्धा के फाइनल में कनाडा के लाचलान मैकनील को 9-2 से हराकर अपना खिताब बरकरार रखा और गोल्डन जीत दर्ज की। टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता बजरंग ने इंग्लैंड के जॉर्ज रैम पर तकनीकी श्रेष्ठता (10-0) से जीत दर्ज कर आसानी से फाइनल में जगह बनाई थी। गत चैम्पियन बजरंग मौरिशस के जीन गुलियाने जोरिस बांडोऊ को महज एक मिनट में पटखनी देकर 6-0 की जीत से सेमीफाइनल में पहुंचे। उन्हें क्वार्टरफाइनल में पहुंचने में दो मिनट से भी कम समय लगा जिसके लिए उन्होंने शुरूआती दौर में नौरू के लोवे बिंघम को गिराकर 4-0 से आसान जीत दर्ज की। बजरंग ने एक मिनट अपने प्रतिद्वंद्वी को समझने में लिया और फिर ‘जकड़ने’ की स्थिति से अचानक बिघंम को पटक कर मुकाबला खत्म कर दिया। बिंघम को इस अचानक से हुए दांव का पता नहीं चला और बजरंग पूनिया आसानी से जीत गए।
दीपक पूनिया ने पाकिस्तान के मोहम्मद इनाम को हराया, जीता गोल्ड
कुश्ती में भारत के तीन गोल्ड आ गए हैं। भारत के दीपक पूनिया ने 86 KG फ्रीस्टाइल में पाकिस्तान के मोहम्मद इनाम को 3-0 से हराया है। इससे पहले उन्होंने सेमीफाइनल मुकाबले में कनाडा के मुरे को 3-1 से हराया था। वहीं, क्वार्टर फाइनल में दीपक ने शेकू कससेगबामा को 10-0 से मात दी थी। दीपक टोक्यो ओलम्पिक में पदक से चूंक गए थे। यह दीपक का पहला कॉमनवेल्थ था। लंबे समय से इसका इंतजार कर रहे थे। चूंकि दीपक ने फाइनल में पाकिस्तान के पहलवान को हराकर पदक जीता है तो खुशियां भी दोहरी हो गई। कुश्तिप्रेमियों ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस से पहले पाकिस्तान के पहलवान को हराकर दीपक ने पदक जीता है। यह केवल खेल ही नहीं, इमोशन्स की भी जीत है। कॉमनवेल्थ गेम्स का यह मुकाबला लंबे समय तक याद किया जाएगा। बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया और दीपक पूनिया ने स्वर्ण पदक जीते। इनकी जीत से हरियाणा का झज्जर जिला खुशी से झूम उठा। पहलवान बजरंग के पैतृक गांव खुडडन में ग्रामीणों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। वहीं गांव छारा में दीपक की जीत का जश्न मना। छारा में दीपक के पिता सुभाष सहित अन्य परिजनों के चेहरे खुशी से चमक उठे। पिता सुभाष ने कहा कि बेटे ने देश के लिए पदक जीतकर उनका सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है।
साक्षी मलिक ने 62 किग्रा में स्वर्ण पदक जीता

वहीं रोहतक की रहने वाली पहलवान साक्षी मालिक ( Sakshi Malik ) ने भी महिला कुश्ती में गोल्ड मेडल जीता है। साक्षी मलिक ने 62 किग्रा के फाइनल में कनाडा की एना गोंडिनेज गोंजालेस को चित करके स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह साक्षी का राष्ट्रमंडल खेलों में पहला स्वर्ण पदक है। इससे पहले वह राष्ट्रमंडल खेलों में रजत और कांस्य पदक जीत चुकी हैं। ओलंपिक कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक अंतिम चार मुकाबले में कैमरून की बर्थे इमिलिएने इटाने एनगोले पर तकनीकी श्रेष्ठता से 10-0 की जीत से फाइनल में पहुंच गयीं। साक्षी ने क्वार्टरफाइनल में भी तकनीकी श्रेष्ठता से जीत हासिल की। उन्होंने इस शुरूआती मुकाबले में मेजबान इंग्लैंड की केलसे बार्नेस को मात दी साक्षी ने कनाडा की खिलाड़ी को हराया। इन खिलाड़ियों की जीत पर देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्म और प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने भी बधाई दी है।
अंशु मलिक ने कुश्ती में भारत को पहला पदक दिलाया

भारतीय महिला पहलवान अंशु मलिक ( Anshu Malik ) ने राष्ट्रमंडल खेलों की 57 किग्रा फ्रीस्टाइल स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश का कुश्ती में खाता खोला। अंशु को फाइनल में नाईजीरिया की ओडुनायो फोलासाडे एडुकुरोये से 3-7 से हार का सामना करना पड़ा। अंशु ने इससे पहले हर मुकाबले में दबदबा बनाया। उन्होंने क्वार्टरफाइनल में आस्ट्रेलिया की इरेन सिमियोनिडिस और सेमीफाइनल में श्रीलंका की नेथमी पोरूथोटागे पर तकनीकी श्रेष्ठता (10-0) से जीत दर्ज की। अंशु मलिक हरियाणा के जींद जिले की रहने वाली हैं। अंशु को फाइनल में नाईजीरिया की ओडुनायो फोलासाडे एडुकुरोये से 3-7 से हार का सामना करना पड़ा। अंशु ने इससे पहले हर मुकाबले में दबदबा बनाया। उन्होंने क्वार्टरफाइनल में आस्ट्रेलिया की इरेन सिमियोनिडिस और सेमीफाइनल में श्रीलंका की नेथमी पोरूथोटागे पर तकनीकी श्रेष्ठता (10-0) से जीत दर्ज की।
सोनीपत के सुधीर ने पैरा पावरलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय का रिकार्ड बनाया

हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव लाठ के सुधीर ( Sudhir ) दिव्यांगता को हराकर नौ साल के संघर्ष के बाद कामनवेल्थ में स्वर्ण पदक जीत कर वैश्विक पटल पर छा गए। उन्होंने पैरा पावर लिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी का रिकार्ड बनाया। सुधीर के इतिहास रचने पर उसके गांव में जश्न का माहौल है। सुधीर जब तीन साल के थे तो उनको बुखार हुआ था। तब उपचार के दौरान इंजेक्शन लगा था और उसके बाद उनके पांव का पूरा विकास नहीं हो पाया। पिता राजबीर और मां सुमित्रा ने अपने लाडले का कभी मनोबल कमजोर नहीं हुआ और हमेशा जीवन में मेहनत करने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। सुधीर ने गांव में 12वीं तक पढ़ाई की। करीब नौ साल पहले गांव में ही एक सामान्य जिम में जाना शुरू किया। वहां पैरा पावर लिफ्टिंग के लिए तैयारी की। इसके बाद जिला और राज्य स्तर पर पदक जीते तो उनके सपनों को पंख लगते चले गए। भाई शक्ति सिंह बताते हैं कि सुधीर ने लगातार सात बार राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीते। सुधीर ने 2018 में इंडोनेशिया में एशियन पैरा गेम्स में कांस्य पदक जीता। बमिंर्घम में कामनवेल्थ गेम्स में पैरा पावर लिफ्टर सुधीर ने स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास दिया। वे कामनवेल्थ (राष्ट्रमंडल) खेलों में पावर लिफ्टिंग में पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। सुधीर ने पुरुषों में हेवीवेट में पहले प्रयास में 208 किलोग्राम, दूसरे प्रयास में 212 किलोग्राम वजन उठाया। तीसरे प्रयास में 217 किलोग्राम वजन उठा कर नया रिकार्ड बनाते हुए इतिहास रच दिया। वे 134.5 अंक लेकर विजेता बने और स्वर्ण पदक जीता।

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