October 3, 2022

ऐसा है भारत और पाकिस्तान के संविधान का इतिहास, जानें इससे जुड़ी कुछ खास बातें

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पाकिस्तान में उठे सियासी संकट के बीच भारत की चर्चाएं न हो ऐसा हो नहीं सकता। पाकिस्तान के पीएम इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर, नेशनल असेंबली को भंग कर दिया गया। अब मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। ऐसे में चर्चा पाकिस्तान संविधान के अनुच्छेत 5 का जिक्र हो रहा है, जिससे नेशनल असंबेली को भंग कर दिया गया।

इन्ही सभी चर्चाओं के बीच हम बात कर रहे हैं भारत और पाकिस्तान के संविधान की। किसी भी देश में सरकार को चलाने के लिए वहां न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधि पालिका की जरूरत होती है। देश संविधान से चलता है। भारत और पाकिस्तान का इतिहास 1947 के बाद से दो मुल्कों के बनने के बाद भारत सरकार और पाकिस्तान सरकार से चलता है। पाकिस्तान का संविधान 10 अप्रैल 1973 को संविधान सभा द्वारा पारित किया गया और 14 अगस्त 1973 को लागू हुआ। जबकि भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था। जबकि दोनों देशों का बंटवारा 1947 में हो गया था। भारत राज्यों का एक संघ है। यह सरकार की संसदीय प्रणाली के साथ एक स्वतंत्र संप्रभु समाजवादी लोकतांत्रिक गणराज्य है। दोनों देशों में कानून संविधान से चलता है और लोकतंत्र प्रणाली को दोनों देश मानते हैं।

पाकिस्तान का संविधान
कहते हैं कि 1947 में आजाद हुए पाकिस्तान ने 1956 का संविधान लागू किया जो मार्च 1956 से अक्टूबर 1958 तक रहा। लेकिन 1958 के तख्तापलट होने के बाद इसे निलंबित कर दिया गया और उसके बाद 10 अप्रैल 1973 को पाकिस्तान का संविधान पारित किया गया और 14 अगस्त 1973 से देश में लागू हुआ। इस संविधान का प्रारूप जुल्फिकार अली भुट्टो की सरकार और विपक्ष ने मिल कर तैयार किया था। ये पाकिस्तान का तीसरा संविधान है और इस में कई बार संशोधन किया जा चुका है।

संविधान के अनुसार, इस्कंदर मिर्जा ने राष्ट्रपति पद ग्रहण किया, लेकिन राष्ट्रीय मामलों में उनकी निरंतर असंवैधानिक भागीदारी के कारण केवल दो सालों में चार निर्वाचित प्रधानमंत्रियों को बर्खास्त कर दिया गया। जनता के दबाव में, राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा ने 1958 में तख्तापलट को वैध ठहराया और इस प्रकार यह संविधान लगभग निलंबित कर दिया गया। 17 फरवरी 1960 को अयूब खान ने देश के भविष्य के राजनीतिक ढांचे पर रिपोर्ट करने के लिए एक आयोग नियुक्त किया। जनवरी 1962 में कैबिनेट ने नए संविधान को मंजूरी दी। इस संविधान में 250 अनुच्छेद थे और इसे 12 भागों और तीन कार्यक्रमों में विभाजित किया गया है। लेकिन 1956 के संविधान की तुलना में इस संविधान में पाकिस्तान के राष्ट्रपति को कई शक्तियां दी गई।

भारत का संविधान
भारत के संविधान की बात करें तो सबसे पहले इसका निर्माण करने वाले बाबा साहेब अम्बेडकर को संविधान निर्माता कहा जाता है। उन्होंने ही संविधान लिखा और तभी से ऐसे ही चलता आ रहा है। भारत का संविधान भारत का सर्वोच्च कानून है। यह सरकार के मौलिक राजनीतिक मूल्यों, नीतियों, प्रक्रियाओं, शक्तियों, अधिकारों और कर्तव्यों को परिभाषित करता है। यह संवैधानिक सर्वोच्चता को व्यक्त करता है न कि संसदीय सर्वोच्चता को क्योंकि यह संसद द्वारा नहीं बल्कि एक संविधान सभा द्वारा स्थापित किया गया है और इसके नागरिकों द्वारा इसकी प्रस्तावना में एक घोषणा के साथ अपनाया गया है।

भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा संविधान है। इसमें शुरू में 22 भाग और 8 अनुसूचियों थी। इसमें लगभग 145,000 शब्द हैं, जो इसे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कामकाजी संविधान बनाते हैं। वर्तमान में 12 अनुसूचियां। अनुच्छेद 245 और 246 के अंतर्गत आते हैं। भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची राज्यों और संघ के बीच शक्तियों को निर्धारित करती है। इसमें तीन सूचियाँ हैं संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची

बता दें कि भारत का संविधान साल 26 नवंबर 1949 को अपनाया गया था। और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। 26 जनवरी को भारत के गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। मसौदा समिति के अध्यक्ष डॉ बी आर अम्बेडकर को आम तौर पर भारतीय संविधान का निर्माता कहा जाता है। संविधान को अपनाने के बाद भारत संघ भारत का आधुनिक और समकालीन गणराज्य बन गया। इसी के आधार पर देश की संसद से लेकर राज्य सरकार में कानून चलते हैं और व्यवस्था कायम है।
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