December 3, 2022

Increasing Suicide Rate: भारत में हो रही आत्महत्याओं के पीछे ये है कारण, जानिए क्या कहती है NCRB की रिपोर्ट

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Increasing Suicide Rate: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर साल आत्महत्या करने वालों की संख्या बढ़ रही है। भारत में 2021 में अब तक 1,64,033 लोगों ने आत्महत्या की है। 2020 में यह संख्या 1,53,052 थी। 2020 की तुलना में 2021 में आत्महत्या की घटनाओं में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस साल आत्महत्या की दर में 6.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। NCRB रिपोर्ट में सबसे दिलचस्प बात यह है कि देश में सबसे ज्यादा 22,207 आत्महत्या करने वाले लोग महाराष्ट्र राज्य में हैं। आए दिन न्यूज़ में हम यह खबरे सुनते ही रहते हैं लेकिन आजकल लोगों को जीने से आत्महत्या करना क्यों आसान लगने लगा है? आज की इस खबर में हम (Suicide Rate In India) इस विषय पर ही बात करेंगे।
पारिवारिक समस्याएं (Family Problems)
बीमारी (Diseases)
लत (Addiction)
वैवाहिक समस्याएं (Marital Problems)
लव अफेयर (Love Affair)
कर्ज में डूबना (Indebtedness)
बेरोजगारी (Poverty)
संपत्ति के मामले (Property Matters)
कैरियर की समस्याएं (Career Problems)
अन्य कारणों से (Other Reasons)
इन सभी कारणों में से कुछ आत्महत्या के सबसे सामान्य कारण हैं, जिनकी वजह से अक्सर आम लोग अपनी जान दे देते हैं। हालांकि, जब कोई सेलिब्रिटी आत्महत्या करता है, तो आत्महत्या के पीछे के कारण कुछ अलग होते हैं। जैसे.. डिप्रेशन, असफलता आदि। आजकल कलाकार की कला को सराहने के बजाय उसमें बिजनेस बढ़ाने के तरीके ढूंढे जाने लगे हैं और इस होड़ में पक्षपात, भाई-भतीजावाद जैसी चीजें जुड़ने के बाद टैलेंटेड लोग डिप्रेशन में चले जाते हैं।
डिप्रेशन (Depression)
लगातार विफलता (Persistent Failure)
कॉम्पिटिशन का दबाव (Competition pressure)
समाज में बदनाम होने का डर (Fear of being defamed in society)
अन्य कारणों से (Other Reasons)
आत्महत्या की वजह चाहे कितनी ही बड़ी क्यों न हो इंसान की जिंदगी से बड़ी नहीं हो सकती है, हम सभी अपनी-अपनी जिंदगियों में किसी न किसी तरह की मुसीबत का सामना कर रहे होते हैं। लेकिन हमे हार मानकर अपनी जान लेने केबारे में नहीं सोचना चाहिए, कई धर्मों में आत्महत्या को बहुत बड़ा पाप माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि खुद अपनी जान लेने वालों की आत्मा को कभी शान्ति नहीं मिलती है। खैर अब हम बात करेंगे की इन आत्महत्याओं को कैसे रोका जा सकता है?
समझें कि सफलता अस्थायी है।

क्षेत्र कोई भी हो, उतार-चढ़ाव आते रहेंगे।
प्रतियोगिता एक खिलाड़ी के रूप में होनी चाहिए, उसे जिंदगी का हिसाब बनाइए खुद पर हावी कभी न होने दें।
संभावनाएं तलाशते रहें।
अगर मन में इस तरह के विचार आते हैं तो उन्हें अपने करीबी लोगों से साझा करें। समय रहते सलाह अवश्य लें।
जीवन सबसे अहम है, इससे बढ़कर कुछ भी नहीं है।
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