August 18, 2022

Commonwealth Games 2022: ऐतिहासिक छलांग मार मुरली श्रीशंकर ने देश को दिलाया एक और मेडल, खत्म किया 44 साल का सूखा

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मुरली श्रीशंकर (Murali Sreeshankar) राष्ट्रमंडल खेलों की एथलेटिक्स प्रतियोगिता की पुरुष लंबी (Indian to win a medal)कूद स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय (Gold medalist Sreeshankar won the silver medal) बने। स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार श्रीशंकर (event in Birmingham late Thursday night) ने अपने पांचवें प्रयास में 8.08 मीटर की दूरी के साथ बर्मिंघम में गुरुवार देर रात इस स्पर्धा का रजत पदक अपने नाम किया। अगर ओवरऑल देखा जाए तो श्रीशंकर कॉमनवेल्थ (Commonwealth’s long jump) के लॉन्ग जम्प में मेडल जीतने वाले दूसरे भारतीय पुरुष एथलीट हैं। मुरली से पहले सुरेश बाबू ने 1978 कॉमनवेल्थ गेम्स में (1978 Commonwealth Games) ब्रॉन्ज मेडल जीता था। यानि 44 साल बाद मेंस लॉन्ग जंप इवेंट में किसी भारतीय ने मेडल जीता है। सुरेश बाबू ने तब लॉन्ग जम्प में ब्रॉन्ज (won the bronze medal) मेडल जीता था।
मुरली ने 8.08 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल जीता
केरल से आने वाले श्रीशंकर के लिए यह इतिहास रचना इतना (cold in England.) आसान नहीं था। उन्होंने इंग्लैंड में पड़ रही कड़ाके की ठंड का सामना करते हुए खुद को मजबूत बनाए रखा। क्वालिफाइंग राउंड में बेहतरीन प्रदर्शन (performed brilliantly) करने वाले श्रीशंकर को फाइनल राउंड में बेहद कड़ाके की (missed the 2018 Gold Coast) ठंड का सामना करना पड़ा। मुरली ने 8.08 मीटर की छलांग लगाकर सिल्वर मेडल जीता (tell you that this is India’s second medal) है। वह एपेंडिसाइटिस के कारण 2018 के गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स से चूक गए थे। बता दें कि CwG 2022 के एथलेटिक्स इवेंट (Tejaswin Shankar)में भारत का यह दूसरा मेडल है। इससे पहले तेजस्विन शंकर ने हाई जंप में ब्रॉन्ज मेडल जीता था। श्रीशंकर के अलावा मोहम्मद अनीस याहिया भी फाइनल (Sreeshankar, Mohammad Anees Yahia)में पहुंचे थे, लेकिन वह 7.97 की बेस्ट जंप के साथ पांचवें स्थान पर (best jump of 7.97) रहे।
मुरली श्रीशंकर से जुड़ी कुछ बातें
कई बच्चे ऐसे होते हैं जो खेल में भी अच्छे होते (good in sports as well as in studies) हैं और पढ़ाई में भी। श्रीशंकर (Sreeshankar)भी उन्हीं में से एक है। उनके माता-पिता दोनों खिलाड़ी रहे हैं, लिहाजा खेल को लेकर नैसर्गिक टैलेंट हमेशा उनके पास रहा(also excellent in studies ) । इसके अलावा, वे पढ़ाई में भी बेहतरीन थे और 2017 में उन्होंने MBBS का एंट्रेंस एग्जाम पास भी कर लिया। अब बस एडमिशन लेने की देर थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। श्रीशंकर ने घरवालों से खेल में करियर बनाने की (career in sports with the family members)बात शेयर की। यह मुश्किल फैसला था, लेकिन घर से उऩ्हें इसकी इजाजात मिल गई, लेकिन, एक शर्त के साथ। शर्त यह थी कि खेलो लेकिन साथ में इंजीनियर बन जाओ। डॉक्टरी से सीधा (Direct Engineering from Doctorate)इंजीनियरिंग। हालाकि श्रीशंकर ने बाद मे खेलो में समय ना मिलने के कराण इंजीनियरिंग भी छोड़ दी।

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