September 30, 2022

World Press Freedom Day: जानिए क्यों और कब से मनाया जा रहा है विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस, यहां जानें सबकुछ

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लोकतंत्र में प्रेस चौथा स्तंभ माना जाता है। इसकी चर्चाएं भी हमेशा होती रहती हैं। हर साल 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (World Press Freedom Day) मनाया जाता है। ऐसे में प्रेस की आजाद कब और कैसे भारत में मिली या विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस की शुरुआत कैसे हुई। इसको लेकर बता रहे हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 में भारतीयों को दिए गए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार में इसका उल्लेख किया गया है।

वैसे विश्व स्तर पर प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के रूप में घोषित किया गया था। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का प्रतीक स्वतंत्रता नहीं है और लोगों को सही जानकारी तक पहुंचने के अधिकार से वंचित किया जाता है। ऐसा अक्सर देश के लिए खतरे के नाम पर किया जाता है।

आज प्रेस और उसके अन्य आधुनिक रूपों, जिन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया भी कहा जाता है। इंटरनेट के कारण सूचनाओं के आदान-प्रदान का माध्यम बहुत तेजी से हो रहा है। आज के वक्त में एक जानकारी एक देश से दूसरे देश तक पहुंचने में कम समय ले रही है। कई जगहों पर सरकारें ऐसे प्रतिबंध लगाती हैं, जो प्रेस की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन भारत में प्रेस को आजादी है। जबकि कई देशों में प्रेस की आजादी सीमित है।

क्यों मनाया जाता है विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस
विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस का उद्देश्य प्रेस स्वतंत्रता के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाना है। इसका उद्देश्य प्रेस की स्वतंत्रता के माध्यम से और समाचारों को जन-जन तक पहुंचाने के माध्यम से सशक्त मीडियाकर्मियों का व्यापक विकास करना है। भारत में समाचार पत्रों का इतिहास वर्नाक्युलर प्रेस अधिनियम से है। भारत में प्रेस परिषद की स्थापना 4 जुलाई 1966 को हुई थी। जिसने अपना औपचारिक कार्य 16 नवंबर 1966 से शुरू किया था। तब से 16 नवंबर को भारत में राष्ट्रीय प्रेस दिवस मनाया जाता है और 3 मई को विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

भारत में प्रथम प्रेस की स्थापना कब हुई
इतिहासकारों की मानें तो 1684 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना कर दी थी। लेकिन भारत के पहले समाचार पत्र के निर्माण का श्रेय जेम्स आगस्टस हिक्की (James Augustus Hicky) नाम के एक अंग्रेज को भी जाता है। जिन्होंने साल 1780 में बंगाल गजट से भारत में प्रेस का दौर शुरू किया। कह सकते हैं कि भारत में अखबारों का इतिहास कम से कम 232 साल पुराना है। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया ने भी अपना विस्तार तेजी से किया है।
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