December 3, 2022

Birthday Special: एक अखबार ने बनाया लवलीना बोरगोहेन को स्टार, एक क्लिक पर पढ़ें असम से टोक्यो पहुंचने तक का सफर

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खेल: टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) में भारत की ओर से 9 बॉक्सर्स ने हिस्सा लिया था। मैरीकॉम (Mary Kom) और अमित पंघाल (Amit Panghal) जैसे दिग्गजों ने निराश किया लेकिन युवा बॉक्सर लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) ने यहां ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए ब्रॉन्ज मेडल देश की छोली में डाला। 69 किग्रा वेल्टर वेट केटेगरी के सेमीफाइनल में हार गईx लेकिन देश के लिए ब्रॉन्ज जीतने में कामयाब रही। आज यानि दो अक्टूबर को वह अपना 25वां जन्मदिन मना रही (happy birthday Lovlina Borgohain) हैं। उनके जन्मदिवस पर आज हम जानेंगे (birthday special) उनके जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें…
मोहम्मद अली के बारे में पढ़ा
लवलीना के ओलिंपिक मेडल तक का सफर काफी खास रहा है। लवलीना असम के गोलाघाट जिले के (Golaghat district of Assam) बड़ा मुखिया गांव की रहने वाली हैं। लवलीना का जन्म 2 अक्टूबर 1997 को हुआ था। लवलीना के पिता टिकेन बोरगोहेन एक बिजनेसमैन हैं और मां ममोनी हाउस वाइफ हैं। तीन बहनों में सबसे छोटी लवलीना बॉक्सिंग से पहले किकबॉक्सिंग किया करती थीं। लवलीना बोरगोहेन के पिता उनके लिए एक दिन मिठाई लाए थे। मिठाई जिस अखबार में लपेटकर लाई गई थी लवलीना उसे पढ़ने लगीं तब पहली बार लवलीना ने मोहम्मद अली (Muhammad Ali) के बारे में पढ़ा और फिर बॉक्सिंग में उनकी रुचि बढ़ी। यहीं से उनके बॉक्सिंग के सफर की शुरुआत हुई। नौ साल पहले मुक्केबाजी में करियर शुरू करने वाली लवलीना दो बार विश्व चैम्पियनशिप ब्रॉन्ज मेडल (bronze medal) भी जीत चुकी है। इसके अलावा उन्होंने 2017 और 2021 की एशियन चैंपियनशिप में भी ब्रॉन्ज मेडल जीता।
स्कूल में कोच की नजर गयी
प्राइमरी स्कूल में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (Sports Authority of India) के लिए ट्रायल हुए। यहां लवलीना पर नजर गई कोच पादुम बोरो (Padum Boro) की जिन्होंने उनका जीवन बदल दिया। उनकी मेहनत का ही नतीजा था कि पांच साल के अंदर लवलीना एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप (Asian Boxing Championship) में ब्रॉन्ज जीतने में कामयाब रहीं। धीरे-धीरे वह आगे बढ़ती रहीं और देश की स्टार बॉक्सर्स में उनका नाम शुमार हो गया। उनके लिए ओलिंपिक की तैयारी आसान नहीं थी। वह अपनी तैयारियों में इतनी व्यस्त थीं की नौ साल तक छुट्टी भी नहीं ले पाई, न ही उन्होंने घर का खाना खाया। वहीं कोरोना संक्रमण के कारण वह अभ्यास (preparations) के लिए यूरोप नहीं जा सकीं। इसके अलावा उनकी मां की तबीयत खराब थी और पिछले साल उनका किडनी प्रत्यारोपण हुआ जब लवलीना दिल्ली में राष्ट्रीय शिविर में थी।
कामनवेल्थ गेम्स में काफी निराशाजनक प्रदर्शन
गौरतलब है कि हाल ही सम्पन हुए कामनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) में लवलीना ने भाग लिया था। जिसमें उनका बेहद निराशा जनक प्रदर्शन था। टोक्यो ओलिंपिक (Tokyo Olympics) में लवलीना बोरगोहेन में एकमात्र बॉक्सर थीं, जिन्हें मेडल मिला था। कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले लवलीन से सिर्फ मेडल ही नहीं गोल्ड मेडल की उम्मीद थी। लेकिन वह मेडल भी नहीं जीत सकी। इसके अलावा कॉमनवेल्थ गेम्स शुरू होने से पहले ही लवलीना विवादों में आ गई थीं। उन्होंने खेल शुरू होने से चंद दिन पहले ट्वीट किया कि उनकी पर्सनल कोच को खेल गांव में एंट्री नहीं मिल रही है। उन्होंने बॉक्सिंग फेडरेशन (Boxing Federation) पर खुद को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया। इसके बाद उनकी कोच संध्या गुरुंग (Sandhya Gurung) को खेल गांव में एंट्री तो दे दी गई, लेकिन टीम की डॉक्टर को होटल में भेज दिया गया। इस सबके बाद भी लवलीना मेडल नहीं जीत पाईं।
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