December 3, 2022

Breastfeeding Week 2022 : जानिए क्यों पहले 6 महीने तक बच्चों को ब्रेस्ट फीडिंग कराने की दी जाती है सलाह, ये है बड़ा कारण

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क्या आप जानते है कि मां के दूध (Mother’s Milk) में कई तरह के लाइफ सेविंग तत्व होते हैं जो शिशु के इम्यून सिस्टम को 90% तक मजबूत बनाते हैं और उन्हें कई गंभीर संक्रामक बीमारियों से भी बचाते हैं। डिलीवरी के बाद पहले 48 घंटों में बच्चे को 5.15 मिली प्रति फीड की जरूरत होती है जिसकी आपूर्ति उसे मां के गाढ़ा पीले रंग के कोलस्ट्रम मिल्क से आसानी से हो जाती है। यह दूध 6 महीने तक के शिशु के लिए संपूर्ण आहार होता है। शिशु की भूख और डिमांड या पीने की बारंबारता के आधार पर ब्रेस्टमिल्क पतला और अधिक मात्रा में बनने लगता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) ने भी शिशु को कम से कम जीवन के पहले 6 महीने तक ब्रेस्ट फीडिंग (Breastfeeding) जरूर कराने की सिफरिश की है। जिसे 2 साल तक जारी रखा जा सकता है। पहले दो वर्षों में बच्चे का जितना विकास होता है, उतना पूरी जिंदगी नहीं होता। बढ़ते शिशु की बढ़ती जरूरत के हिसाब से हालांकि 6 महीने के बाद भले ही अर्द्ध ठोस आहार या फार्मूला मिल्क देना शुरू करना पड़ता है। लेकिन कम से कम 2 साल तक ब्रेस्ट फीडिंग कराना उसे फिट और हैल्दी रखने में सहायक माना जाता है।
इम्यूनिटी करे मजबूत
मां के शरीर में मौजूद एंटीबॉडीज ब्रेस्टमिल्क के माध्यम से बच्चे में खुद ब खुद पहुंचते हैं और बच्चे की इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं। मां बनने से पहले महिला विभिन्न वायरस, बैक्टीरिया या इंफेक्टिव एजेंटों से एक्सपोज होती रहती है। जिनसे लड़ने के लिए महिला का शरीर एंटीबॉडीज का निर्माण करता रहता है। मां बनने के बाद ये एंटीबॉडी ब्रेस्टमिल्क में आ जाते हैं। डिलीवरी के बाद आने वाला कोलेस्ट्राम मिल्क बच्चे के लिए सबसे ज्यादा लाभदायक होता है। इसमें मौजूद एंडीबॉडीज बच्चे को बीमारियों से बचाते हैं और शिशु के पोषण के साथ-साथ रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। ये तत्व शिशु के इम्यून सिस्टम को 90 फीसदी तक मजबूत बनाते हैं और कई संक्रामक बीमारियों से भी बचाते हैं।
बचाएं एलर्जी से
कोलस्ट्रम शिशु के लिए अमृत के समान होता है। इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट, विटामिन्स, मिनरल्स, वसा जैसे पोषक तत्व जहां शिशु के विकास में सहायक होते हैं। वहीं इम्यूनोग्लोब्यूलिन, लिंफोसाइट, लैक्टोफेरिन, बाइफीडिस जैसे एंटीऑक्सीडेंट तत्व उसके लिए लाइफ लाइन का काम करते हैं। बच्चों को कई तरह के एलर्जिक रिएक्शन से बचाते हैं। ब्र्रेस्टमिल्क में एपिडर्मिक ग्रोथ कंपाउंड भी होता है, जो बच्चे की त्वचा, आंतों की लेयर्स को हैल्दी रखने में मदद करता है। जिसकी वजह से भविष्य में बच्चों को एलर्जी, फूड एलर्जी, अस्थमा, एग्जीमा से बचाते हैं।
ज्ञानेन्द्रियों का बेहतर विकास
रिसर्च से साबित हो गया है कि ब्रेस्टफीडिंग लेने वाले बच्चों की पांचों ज्ञानेन्द्रियां (आंख, नाक, कान, जीभ और त्वचा) बहुत अच्छी तरह विकसित होती हैं। ब्रेस्टफीडिंग के लिए बच्चा मां को ढूंढता है, जिससे उसकी नजर अच्छी होती है। मां के पुचकारने पर बच्चा सुनता है, श्रवण क्षमता इम्प्रूव होती है। मां की स्मैल से बच्चा पहचानता है, सूंघने की क्षमता बेहतर होती है। दूध पीते वक्त उसका टेस्ट सेंस अच्छी होती है। मां का स्पर्श बच्चे की टच-सेंसेशन को बढ़ाता है।
मां-बच्चे में बढाए बॉन्डिंग
ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बच्चा मां के बहुत करीब होता है। इससे उनकी बॉन्डिंग अच्छी होती है। यानी भावनात्मक जुड़ाव मजबूत बनता है जो शिशु के विकास के लिए बेहद जरूरी है। मां के संपर्क में आने पर वह खुद को सुरक्षित महसूस करता है जिससे उसे नींद अच्छी आती है।
भविष्य में कई बीमारियों से बचाव
लंबे समय तक ब्रेस्टफीडिंग करने वाले बच्चों को भविष्य में कई तरह की बीमारियों से बचाव होता है। बड़े होने पर मोटापा, ब्लड प्रेशर, टाइप 2 डायबिटीज जैसी बीमारियां होने की संभावना कम रहती है।
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