December 8, 2022

जिंदगी बर्बाद कर सकती है Overthinking, इन आसान टिप्स से करें दिमाग को कंट्रोल

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Tips To Control Overthinking: आजकल के जमाने में ज्यादातर लोग किसी भी टॉपिक या बात पर बहुत ज्यादा सोचने यानी ओवरथिंकिंग (Overthinking) करने की आदत के शिकार होते हैं। यह समस्या काफी आम हो चली है, लोग उन विषयों पर भी ओवरथिंकिंग करते हैं, जिनसे उनका कोई खास वास्ता नहीं होता। कई बार लोग अपने दिमाग में ही कुछ ऐसी सिचुएशन की पिक्चर बना लेते हैं, जो उनके आसपास हो भी नहीं रही होती हैं। ओवरथिंकिंग हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत घातक हो सकती है, इससे बचने के लिए यहां बताए जा रहे उपायों को अपनाइएं और अपने मन को सुकून (How To Control Overthinking) दीजिए।
आजकल अधिकतर लोग यह कहते नजर आते हैं, ‘मैं किसी बात को लेकर ज्यादा कुछ नहीं सोचना चाहता।’,’मुझे इस मामले को लेकर कोई टीका-टिप्पणी नहीं करनी।’, ‘उस घटना को लेकर मुझे किसी तरह का कोई विचार अपने मन में नहीं लाना।’ बावजूद इसके लोग कुछ ज्यादा ही सोचते हैं। कुछ ना कुछ दिमाग में चलता ही रहता है। कई बातें मन में हलचल मचाए रखती हैं,जबकि यह सब जरूरी नहीं है। बहुत सारे गैर-जरूरी विचार मन में उछल-कूद करते रहते हैं। जानने-सुनने में यह सामान्य सी (Stop Overthinking) बात लगती है, लेकिन गहराई से समझने पर इसका बहुत खास असर नजर आता है। मन की सेहत से लेकर शरीर की सेहत तक सब कुछ इससे प्रभावित होती है। हमारा दृष्टिकोण बनाने से लेकर सामाजिक जीवन तक इसके असर से अछूता नहीं रहता। इसीलिए ओवरथिंकिंग पर लगाम लगाना जरूरी है। कुछ बातें हैं, जो विचारों के भंवर से (How To Control Your Mind) हमें बचा सकती हैं:-
खुद को बिजी रखें (keep yourself busy)
सार्थक कार्यों में व्यस्त रहना हमें ओवरथिंकिंग से बचाता है। हां, इतनी सजगता जरूरी है कि ‘बिजी विदआउट बिजनेस’ वाली व्यस्तता के फेर में ना पड़ें। देखने में आता है कि आजकल अधिकतर लोग इस जुमले के मुताबिक ही बिजी हैं। खासकर सोशल मीडिया पर मौजूदगी में ज्यादा समय बीत रहा है। वहां हर पल सामने आने वाले अजब-गजब समाचार और जानकारियां चाहे-अनचाहे मन में हलचल मचाते हैं। कभी सवाल पैदा करते हैं तो कभी संदेह। जबकि हर सूचना या जानकारी का विश्लेषण हर किसी के लिए जरूरी नहीं है। कितने ही विषयों पर बेवजह सोचने को विवश करते दुनियाभर के अपडेट्स असल में कितने सही हैं? यह भी अपने आप में एक बड़ा सवाल है। ऐसे में सही ढंग से मन और मस्तिष्क को व्यस्त रखकर ज्यादा सोचने के भंवर में फंसने से बचा जा सकता है। वर्तमान पर ध्यान देकर खुद को व्यस्त रखना सबसे सहज राह है।
हालातों को स्वीकारें (accept the situation)
परिस्थितियों के प्रति स्वीकार्यता हमें बेवजह की सोच में गुम होने से बचाती है। कई बार जिंदगी के साथ जो है, जैसा है के भाव से चलना बेहद जरूरी होता है। उलझन भरे हालातों में बहुत ज्यादा सोचकर भी जब कोई राह नहीं निकले तो कुछ समय के लिए ठहर जाने में कोई बुराई नहीं है। साथ ही यह समझना भी जरूरी है कि अकेले आप ही नहीं बल्कि बहुत से लोग अनचाहे हालातों से जूझ रहे हैं। ऐसी बातें हमें अपनी परिस्थितियों को सहजता से स्वीकार करने का मन बनाने में मददगार बनती हैं। साथ ही आगे के लिए भी एक सकारात्मक भाव मन में लाती हैं।
बनाएं रखें शारीरिक सक्रियता (maintain physical activity)
किसी भी तरह की एक्सरसाइज, योग, सुबह-शाम की सैर या कोई खेल बेवजह के विचारों पर लगाम लगाने में बहुत हद तक कारगर है। ऐसी एक्टिविटीज करते हुए आमतौर पर अपने परिवेश से जुड़ना हमें व्यावहारिक रूप से अपने आस-पास की चीजों से जोड़ता है। मन के भीतर मची उथल-पुथल से बाहर लाता है। इतना ही नहीं शारीरिक सक्रियता से होने वाली थकान के चलते अच्छी नींद का आना भी आपको ओवरथिंकिंग से बचाता है। देखने में आता है कि बहुत ज्यादा सोचने वाले लोग अच्छी नींद नहीं ले पाते। ऐसे में शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, इंसान को हर तरह से पॉजिटिव बनाने में मददगार रहता है।
नियमित करें ध्यान (meditate regularly)
ध्यान यानी मेडिटेशन ओवरथिंकिंग से बचाने में लिए बेहद मददगार साबित हो सकते हैं। आंकड़े बताते हैं कि आज हर पांच में से एक इंसान ओवरथिंकिंग का शिकार है। ऐसे में मन के मोर्चे पर सुकून लाने के प्रयास जरूरी हैं, वरना यह आदत कई गंभीर बीमारियों की ओर भी धकेल सकती है। इमोशनल ट्रॉमा और निराशा का शिकार बना सकती है। वर्तमान या बीते समय में झेले गए भावनात्मक-मनोवैज्ञानिक ट्रॉमा को भूलने के बजाय ओवरथिंकिंग उस पीड़ा से निकलने ही नहीं देती। मन दुख के उस चक्रव्यूह से निकलने के बजाय और फंसता जाता है और फंसा ही रहता है। यह उलझाव निर्णय लेने में अस्पष्टता और उलझन लाता है। विचारों का यह चक्रव्यूह जिंदगी के हर पहलू को प्रभावित करने लगता है। ऐसे में मन के ठहराव के लिए ध्यान का सहारा लिया जा सकता है। ध्यान का अभ्यास हमारे विचारों में स्पष्टता लाता है। दोषारोपण के बजाय स्वयं का मूल्यांकन करने और अपने भीतर झांकने का दृष्टिकोण देता है। जिसके चलते मन-मस्तिष्क ज्यादा सोचने के बजाय उस एक पल में अपने काम को बेहतर करने पर केंद्रित होने लगता है।
डॉ. मोनिका शर्मा
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